Description: "अनुगूँज खामोशी की प्रतिध्वनि" एक संवेदनशील काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन के विविध रंगों को शब्दों में पिरोया गया है। इन कविताओं में कहीं प्रेम की कोमलता है, कहीं खामोशियों की गहराई, कहीं सपनों की उड़ान है तो कहीं यथार्थ की सच्चाई। यह पुस्तक उन अनकहे भावों की प्रतिध्वनि है, जो अक्सर दिल में दबे रह जाते हैं पर भीतर गूँजते रहते हैं। हर कविता पाठक को स्वयं से जुड़ने और अपने अनुभवों का प्रतिबिंब खोजने का अवसर देती है। "अनुगूँज" केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि आत्मा और संवेदनाओं की यात्रा है।
Brief description: राजेश विक्रम सिंह, पेशे से शिक्षक और हृदय से कवि, जीवन को कविता की दृष्टि से देखते हैं। उनकी कविताएँ रिश्तों की मिठास, खामोशियों की गहराई और सपनों की उड़ान का अनोखा संगम हैं। वे मानते हैं कि कविता केवल शब्दों का क्रम नहीं, बल्कि आत्मा और पाठक के बीच एक पुल है। "अनुगूँज खामोशी की प्रतिध्वनि" उनके अनुभवों, भावनाओं और विचारों का संग्रह है, जो पाठकों को न केवल पढ़ने बल्कि महसूस करने का अवसर देगा।