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Kapal Kundla

Contributor(s): Chattopadhyay, Bankimchnadra (Author)

ISBN: 9789390963171

Publisher: Prabhakar Prakshan

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Pub Date: June 25, 2021

Lexile Code: 0000

Target Age Group: NA to NA

Physical Info: 0.28" H x 8.50" L x 5.50" W ( 0.35 lbs) 130 pages

BISAC Categories:

Fiction | General

Descriptions, Reviews, etc.

Description: खेत में बीज पड़ जाए तो वह अपने आप अंकुरित हो जाता है। जब बीज अंकुरित होता है, तब कोई जान नहीं पाता- कोई देख नहीं पाता। किन्तु एक बार बीज पड़ जाए और बीज डालने वाला कहीं भी क्यों न रहे धीरे-धीरे अंकुर से वृक्ष सिर ऊँचा कर खड़ा हो जाता है। शुरू में वृक्ष उंगली बराबर होता है, जिसे देखकर भी कोई देख नहीं पाता। क्रमशः वह तिल-तिल बढ़ता जाता है और फिर वृक्ष आधा हाथ, एक हाथ, दो हाथ के बराबर हो जाता है। तब भी अगर उससे किसी की स्वार्थ-सिद्धि की संभावना न रहे तो उसकी ओर कोई देखता नहीं या देखकर भी नहीं देखता। - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

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