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Jab Ghutati He Sans Aadmi KI

Contributor(s): Ramesh, Divik (Author)

ISBN: 9789390916535

Publisher: Jvp Publication Pvt. Ltd.

Hardcover
$36.99
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Pub Date: July 28, 2021

Lexile Code: 0000

Features: Dust Cover

Target Age Group: NA to NA

Physical Info: 0.38" H x 8.50" L x 5.50" W ( 0.68 lbs) 150 pages

BISAC Categories:

Poetry | General

Descriptions, Reviews, etc.

Description: 20वीं शताब्दी के आठवें दशक में उभर कर आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण कुछ ही दृष्टिसंपन्न कवियों में से एक दिविक रमेश का यह नवीनतम कविता-संग्रह न केवल सशक्त कविताओं से समृद्ध है बल्कि कविता- परम्परा में भी जोड़ने में सक्षम है। इस संग्रह की कविताओं से गुजर कर पाठक यह महसूस करेंगे कि कवि का लोगों से, अपनी प्रकृति और परिवेश से घनिष्ठ संबंध रहा है। आत्मीय रिश्ता है। गहरा प्रेम है। एक कोमल कवि हृदय की ईमानदार अभिव्यक्ति है दिविक रमेश की कविता। मनुष्य ही नहीं मानवेतर प्राणी, नदी, सागर, पहाड़ आदि से संबंधित कविताओं में कवि के संवेदनात्मक धरातल के साथ-साथ, उसकी चिंता और सरोकार का साक्षात्कार किया जा सकता है। साथ ही, ये कविताएँ कवि की जीवनदृष्टि का परिचायक हैं। इन कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता है कि इनमें उदासी, हताशा, निराशा, तो हैं, लेकिन वे उदास, हताश, निराश नहीं करती हैं। अंधकार का चित्रण अवश्य है, लेकिन उस अंधकार की गहनता को दूर करते हुए प्रकाशोन्मुख होने का सूत्र विद्यमान है। दिविक रमेश का कवि कभी नाउम्मीद नहीं होता है।

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