Book Cover

Chandrakanta

Contributor(s): Nandan, Devaki Khatri (Author)

ISBN: 9789389851243

Publisher: Prabhakar Prakshan

Binding Types:

$19.99
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Pub Date: May 28, 2019

Lexile Code: 0000

Target Age Group: NA to NA

Physical Info: 0.57" H x 8.50" L x 5.50" W ( 0.70 lbs) 270 pages

BISAC Categories:

Fiction | Romance | Fantasy

Descriptions, Reviews, etc.

Description: किसी तरह किसी की लौ तभी तक लगी रहती है जब तक कोई दूसरा आदमी किसी तरह की चोट उसके दिमाग पर न दे और उसके ध्यान को छेड़ कर न बिगाड़े, इसीलिए योगियों को एकांत में बैठना कहा है। कुँवर वीरेंद्र सिंह और कुमारी चन्द्रकांता की मुहब्बत बाज़ारू न थी, वे दोनों एक रूप हो रहे थे, दिल ही दिल में अपनी जुदाई का सदमा एक ने दूसरे से कहा और दोनों समझ गए मगर किसी पास वाले को मालूम न हुआ, क्यूंकि ज़ुबान दोनों की बंद थी। -देवकीनन्दन खत्री

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