Description: जीवन के परम रहस्यों को परत दर परत खोलने वाली इस कथा का जन्म वाराणसी जिले के सारनाथ में जापान के सहयोग से चल रही बौद्ध स्थल सुंदरीकरण परियोजना में कार्यरत कुछ दोस्तों के आपसी संबंधों और गंगा के किनारे एक आश्रम से उनके चाहे अनचाहे जुड़ाव से होता है। इन सब का यह आपसी संबंध एक हल्की फुल्की जीवंत कथा के रूप में विकसित हो कर हमें जीवन के अति गूढ़ महारहस्यों तक ले जाता है। इस दौरान तमाम पौराणिक पात्रों चार्वाक, तक्षक, बुद्ध, मैत्रेय आदि के रहस्यों से गुजरते हुए यह कथा अपने चरमोत्कर्ष पर सारनाथ के धमेख स्तूप पर बुद्ध पूर्णिमा के दिन पहुंचती है। कथा में प्रस्तुत दृष्टिकोण पूरी तरह वैज्ञानिक है। जहां कहीं भी यह विज्ञान से थोड़ा भी हटी है वहां इसे पूरी तरह तर्कयुक्त रखने की कोशिश की गई है। इसे संक्षेप में हम एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक कथा कह सकते हैं जो अवश्य ही पठनीय है।