Description: *आदिम आवाज़ें और सात सुरों की बारिश* कविता- संग्रह में मेरे प्रिय कवि अनिल पुष्कर ने अपनी बात को बड़े ही अनोखे अंदाज़ में कहने की कोशिश की है। समाज में व्याप्त जो विसंगतियां और विद्रूपताएं हैं उनको नज़र में रखते हुए इन्होंने प्रतीकों के सहारे मन के भावों को पाठक तक पहुँचाने में बेहतरीन कामयाबी हासिल की है। इन्होंने बड़े ही चुनौतीपूर्ण तरीक़े से समाज की अंदरूनी चालाकियों को जंगल और पशुओं के बहाने से अपनी कविताओं को उस मुक़ाम तक पहुँचाया है जहाँ से पाठक को लगने लगता है कि वह किसी कुचक्र का शिकार हो गया है। इस बेहतरीन प्रतीकात्मक काव्य -यात्रा के लिए मैं अपने प्रिय कवि अनिल पुष्कर को इस उम्मीद के साथ बधाइयाँ देता हूँ कि आप आने वाले वक़्त में भी इस रचनात्मक धार को यूं ही बरकरार रखेंगे। आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ -डॉ सागर (फ़िल्म-गीतकार)